परिष्कार की शिक्षण पद्धति

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हमारी शिक्षण-पद्धति

परिष्कार कोचिंग संस्थान उत्तर भारत का ऐसा संस्थान है जिसकी सफलता का प्रतिशत सबसे अधिक है और उसका कारण है यहाँ की बुद्धिमता, ईमानदारी और कठोर मेहनत से विकसित की गई शिक्षण-पद्धति.

छोटी कक्षाएँ

सीमित छात्रों की छोटी कक्षाएँ जिनमें शिक्षक सब विद्यार्थियो को समझा सकता है और प्रत्येक विद्यार्थी बिना हिचक प्रश्न भी पूछ सकता है। कक्षा में किसी भी मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। यद्यपि बड़ी कक्षाओं में कम शिक्षक लगाने पड़ते हैं, संस्था का खर्च कम होता है किंतु सभी विद्यार्थी न तो ठीक तरह समझ पाते हैं न जिज्ञासा शांत कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में भीड़ भरी बड़ी ऐसी संस्थाओं के विद्यार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत बहुत कम रहता है। परिष्कार में विद्यार्थी को प्रश्न पूछने का, अपनी शंकाओं के समाधान करने का पूरा अधिकार है। विद्यार्थी इस अधिकार का उपयोग 200-300 विद्यार्थियों की संख्या में नहीं कर सकता। परिष्कार इसीलिए छोटे आकार की कक्षाएँ संचालित करता है।

उच्च कोटि के शिक्षक

उच्च कोटि के शिक्षकों द्वारा ही परिष्कार में शिक्षण होता है। परिष्कार का प्रत्येक शिक्षक अपने मूल विषय में बहुत अच्छे अंकों से पोस्ट ग्रेजुएट तो होता ही है, बहुत-से शिक्षक एम.फिल एवं पीच.डी. भी हैं। बहुत-सी कोचिंगों के संचालक या उस कोचिंग के शिक्षक खुद ही उच्च कोटि की शिक्षा प्राप्त किए हुए नहीं हैं वे विद्यार्थियों में क्या गुणवत्ता पैदा करेेगे? किंतु परिष्कार में शिक्षकों द्वारा उन्हीं उच्च स्तरीय पुस्तकों से नोट्स बनवाए गए हैं; जिन पुस्तकों को उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय भी मान्यता प्रदान करे। इसीलिए विवादास्पद प्रश्नों में परिष्कार के शिक्षकों द्वारा सुझाई गई पुस्तकों से RPSC तथा अन्य बोर्डों की Answer Key कई बार रद्द करवाई है और सैकड़ों-हज़ारों विद्यार्थियों ने न्यायालय में अपना वाद जीतकर नौकरियाँ प्राप्त की हैं।

परिष्कार में ऐसे ही शिक्षकों को रखा जाता है जिनके पास पढ़ाने का अच्छा अनुभव है, प्रत्येक टाॅपिक पर अनेक पुस्तकों का अध्ययन हो, विद्यार्थियों के अधिकतम प्रश्नों का तत्काल उत्तर देने की क्षमता रखते हों और वे लगातार नवीनतम ज्ञान से जुड़े रहते हों।

PPT/OHP के शिक्षक`

परिष्कार के शिक्षक PPT एवं OHP से पढ़ाते हैं जिसके कारण विद्यार्थी चित्रों, नक्शों से कम समय में, आसानी से पक्का-पक्का सीख लेते हैं।

स्तरीय एवं नवीनतम नोट्स

परिष्कार के शिक्षक स्तरीय नोट्स से पढ़ाते हैं। परिष्कार में नोट्स लिखाना वर्जित है। कक्षा में विषय-सामग्री लिखाने में विद्यार्थियों का समय बर्बाद होता है, एक घंटे की कक्षा में 15 मिनट का भी काम नहीं होता। विद्यार्थियों को कम प्रश्नों के उत्तर मिल पाते हैं; शिक्षक को जो याद रहता है बस वह लिखा देते हैं बाकी सब छूट जाता है; लिखते समय विद्यार्थी भी लिखने में गलती कर सकता है जिससे वह प्रश्न का गलत उत्तर दे सकता है। दरअसल कक्षाएँ लिखने के लिए नहीं, समझने के लिए होती हैं और परिष्कार में समझाने का काम किया जाता है, लिखने की सामग्री नोट्स के रूप में दी जाती है।

परिष्कार में लिखने के काम की पूर्ति उच्च स्तरीय शुद्ध नोट्सों द्वारा की जाती है। परिष्कार के नोट्स अधिकतम प्रश्नों के उत्तर और प्रामाणिक उत्तर लिए हुए होते हैं। वे यहाँ के विद्यार्थी को निःशुल्क दिए जाते हैं और मुद्रित होने के कारण पढ़ने में आसान होते हैं; उनमें डाइग्राम, चित्र, नक्शे आदि भी होते हैं। उनमें पिछली परीक्षाओं के प्रश्नों के उत्तर भी समाहित होते हैं। परिष्कार के नोट्स लगातार संशोधित होते रहते हैं।

बाजार में लोग परिष्कार के कई वर्ष पुराने नोट्स की फोटोकाॅपी करके व्यवसाय करते हैं जिससे विद्यार्थियों को नुकसान होता है। परिष्कार के नवीनतम आँकड़ों से युक्त संशोधित नोट्स ही विद्यार्थी के लिए लाभप्रद हैं।हज़ारों विद्यार्थियों ने केवल परिष्कार के नोट्स से तैयारी करके भी नौकरियाँ प्राप्त कर ली हैं। परिष्कार का शिक्षक नोट्स को समझाता है और इससे विद्यार्थी को नोट्स की सामग्री याद हो जाती है और वह सफल हो जाता है।

समझना-समझाना महत्त्वपूर्ण

हिंदी-संस्कृत-अंग्रेजी के व्याकरण, हिंदी-संस्कृत-अंग्रेजी के साहित्य, गणित, रीजनिंग, शिक्षा-मनोविज्ञान, विभिन्न विषयों की शिक्षण-पद्धति, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और विशेष रूप से विज्ञान के विषयों में जहाँ याद करने के साथ-साथ समझना ज़रूरी है, और एप्लीकेशन के प्रश्नों के उत्तर देना ज़रूरी है, वहाँ नोट्स मदद नहीं कर पाते, वहाँ शिक्षक से रू-ब-रू होकर समझना ही ज़रूरी होता है। इसलिए पूरी कक्षा को अच्छी तरह समझानेवाले सक्षम शिक्षकों की आवश्यकता होती है और परिष्कार में ऐसे शिक्षक ही पढ़ाते हैं।

निगेटिव मार्किंग में प्रश्न कैसे हल करें?

निगेटिव मार्किंग प्रणाली में यह जानना बहुत ज़रूरी है कि जिन प्रश्नों का उत्तर नहीं आता उनको हल कैसे करें और उनसे भी नंबर कैसे लें! परीक्षा देने की ऐसी तकनीक जिसे केवल परिष्कार ने ही विकसित कर रखी है, उसको समझाया जाता है और OMR टैस्ट पर उसका प्रयोग करके विद्यार्थी को अधिकतम अंक लाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है ताकि निगेटिव मार्किंग की परीक्षा-पद्धति में अनावश्यक प्रश्न करके सफल होता हुआ परीक्षार्थी असफल न हो जाए। परिष्कार के विद्यार्थियों को यह वैज्ञानिक पद्धति समझाई जाती है और इसलिए भी परिष्कार के विद्यार्थी निगेटिव मार्किंग पद्धति में सीमित ज्ञान से भी सफलता हासिल करते हैं